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Showing posts from July, 2020

نعمتوں پر شکر اور مصائب پر صبر مطلوب ہے

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  نعمتوں پر شکر اور مصائب پر صبر مطلوب ہے ✍️از حضرت مولانا عبد الرشید صاحب المظاہری شیخ الحدیث مدرسہ اسلامیہ عربیہ  بیت العلوم سراۓ میر اعظم گڑھ یوپی  بسم اللہ الرحمن الرحیم  انسان اس دنیا میں صبر وشکر دوامروں  کے درمیان ہر وقت دائر ہے  اللہ کا بندہ اپنے اوپر آنے والے حالات کے لحاظ سے پریشانی یاراحت میں ہوتا ہے پریشانی پر صبر کرتا ہے اور راحت  میں خدا کا شکر ادا کرتا ہے اس پر کچھ حالات ایسے ہوتے ہیں جن پر صبر کا مطالبہ ہے کچھ ایسے ہوتے ہیں جن پر شکر کا مطالبہ ہے انسان ہر وقت صبر اور شکر کی دو پہیہ سواری پر سوار ہے انعامات الہیہ تو بے شمار ہیں اور مصیبت کبھی اور کم آتی ہے نعمتوں کے مقابلے میں آزمائش کم ہوتی ہے مگر انسان مصیبت میں بہت جلد گھبراجاتا ہے نعمت پر شکر کرتا ہے تو انسان کا نفع ہے ، مصیبت پر صبر کرتا ہے انسان کانفع ہے ، اللہ تعالی نے دونوں پر جزاء اور بدلہ  کا وعدہ فرمایا ہے شکر پر نعمت  کا اضافہ مرتب ہوتا ہے صبر پر اللہ کے انعامات کا مستحق ہوتا ہے بندہ خداء ہر حال میں راضی بہ قضا ءخداوندی ہوتا ھے اور جو بندہ اللہ کی تقدیر پر راضی ہو...

* خاتمۂ بالخیر👈* *_ایک سبق آموز واقعہ __!!*

*👈 خاتمۂ بالخیر* *_ایک سبق آموز واقعہ __!!* ایک استاد اپنے شاگردوں کو عقیدہ توحید کی تعلیم دے رہے تھے۔ انہیں کلمہ "لا الہ الا اللہ"  کا مفہوم اور اس کے تقاضے سمجھا رہے تھے۔  ایک دن کا واقعہ ہے کہ ایک شاگرد اپنے استاد کے لیے ایک طوطا بطور تحفہ لے کر حاضر ہوا۔ استاذ کو پرندے اور بلی پالنے کا بڑا شوق تھا۔ وقت گزرنے کے ساتھ ساتھ استاد کو اس طوطے سے بھی بڑی محبت ہوگئی۔ چنانچہ وہ اس طوطے کو اپنے درس میں بھی لے جایا کرتے تھے۔ یہاں تک کہ طوطا بھی "لا الہ الا اللہ"  بولنا سیکھ گیا۔ پھر کیا تھا طوطا دن رات لا الہ اللہ اللہ بولتا رہتا تھا۔  ایک روز شاگردوں نے دیکھا کہ ان کے استاذ پھوٹ پھوٹ کر رو رہے ہیں۔ وجہ دریافت کی گئی تو استاذ فرمانے لگے: افسوس! "میرا طوطا آج مر گیا" شاگردوں نے کہا: آپ اس کے لیے کیوں رو رہے ہیں؟ اگر آپ چاہیں تو ہم دوسرا اس سے خوبصورت طوطا آپ کو لا دیتے ہیں۔  استاذ نے جواب دیا: میرے رونے کی وجہ یہ نہیں۔ بلکہ میں اس لئے رو رہا ہوں کہ جب بلی نے طوطے پر حملہ کیا تو اس وقت طوطا زور زور سے چلائے جارہا تھا یہاں تک کہ وہ مرگیا۔ حالانکہ وہی طوطا اس سے پہ...

आज के मुसलमानों के हालात (पार्ट-2)

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आज के मुसलमानों के हालात (पार्ट-2) कहते हैं एक बार एक शिकारी जंगल से तीतर पकड़ के लाता है और उसे अपने घर में एक अलग पिंजरे में रखता है, और खूब काजू, किशमिश, बादाम खिलाता है, जब तीतर बड़ा हो जाता है तो उसे पिंजरे के साथ जंगल में लेके जाता है, वहां जाल बिछाता है और तीतर को वहीं पिंजरे में रखकर खुद झाड़ी के पीछे छुप जाता है और तीतर से बोलता है कि "बोल बेटा बोल"... तीतर अपने मालिक की आवाज़ सुनकर जोर जोर से चिल्लाता है.. उसकी आवाज सुनकर जंगल के सारे तीतर (ये सोच कर कि अपने कौम का है जरूर किसी परेशानी में है, चलो मदद करते हैं) खिंचे चले आते है और शिकारी के बिछाए हुवे जाल में फंस जाते हैं.., शिकारी मुस्कुराते हुए आता है और पालतू तीतर को अलग और पकड़े गए सारे तीतर को अलग झोले में डालकर घर लाता है... फिर अपने पालतू तीतर के सामने पकड़े गए सब तीतरों को एक एक कर के काटता है, मगर पालतू तीतर उफ्फ तक नहीं करता... उसे अपने हिस्से की खुराक किशमिश काजू बादाम जो मिल रहा था..!! कमोबेश यही हालत आज के मुसलमानों की भी हो गई है, शिकारी ने ना जाने कितने ऐसे तीतर पाल रखे हैं, जिनकी वजह से कौम दुश्मन के...

ہماری نظر اور فکر اللہ کی مرضی کے مطابق ہو

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ہماری نظر اور فکر اللہ کی مرضی کے مطابق ہو  ✍️احضرت مولانا عبد الرشید صاحب المظاہری شیخ الحدیث مدرسہ اسلامیہ عربیہ بیت العلوم سراۓ میر اعظم گڑھ یوپی بسم اللہ الرحمن الرحیم  اسلامی شعار میں ایک اہم شعارعالم کے اہل اسلام کے لئے قربانی ہے اسی نسبت سے مسلمانوں کی عیدثانی عید قرباں کے نام سے معروف ہے ہماری جان بھی اللہ کی دی ہوئی ہمارا مال بھی اللہ کا عطیہ  اللہ تعالی نے جو کام کرنے کو کہا اس پر ہماری جان اور مال قربان مسلمان روزہ رکھتا ہے ، ہمارے ملک میں ابھی قریب میں اپریل مئی کے سب سے گرم مہینے میں رمضان کے ایک مہینے کا روزہ گزرا چودہ گھنٹے سے بھی زائد بڑے دن میں مگر مسلمان ہمت نہ ہارا نہ کھانا نہ پینا نہ بیوی سے ہمبستر ہونا اللہ نے اپنی پابندی لگا دی ھم نے بسر و چشم قبول کیا روزہ کا حکم دیا ، بدل و جان تیار ہوگئے عمل کے واسطے کود پڑے ہمارا روزہ صرف اَن چھوڑنے کا نام نہیں یہاں تو " انا " (میں ہونا)چھڑایا جاتا ہے اللہ کے حکموں پر قربان ہونا ہمارا شیوہ ہے چنانچہ مال تجارت سونے چاندی اور نقد روپیو ں میں زکوۃ کا حکم دے دیا تو ہم نے اپنے مالوں کی زکوٰۃ نکالنا شروع کر دیا حساب لگ...

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में प्रमुखता से संविधान का उल्लंघन किया: श्री दिनेश द्विवेदी

Reference - Livelaw (Radhika Roy) "बड़े पैमाने पर, सर्वोच्च न्यायालय संविधान और जनविरोधी कानून को बनाए रखता रहा है। मेरी मजबूत भावना एकमात्र समय है जब सर्वोच्च न्यायालय विरोधीवाद को बनाए रखने में विफल रहा, जब उन्होंने मस्जिद मामले में अनुच्छेद 142 की शक्ति का उपयोग किया और पक्ष में फैसला किया।  हिंदू-बहुमत। यह वह जगह है जहां मुझे लगता है कि वे असफल रहे ", भारत के सर्वोच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश द्विवेदी ने" द कोर्ट्स एंड कॉन्स्टीट्यूशनल वैल्यूज़ "विषय पर लाइवलाव द्वारा आयोजित एक वेबिनार में कहा।  अयोध्या के फैसले पर टिप्पणी करते हुए, उन्होंने कहा कि दो कारण हो सकते हैं जो न्यायाधीशों के दिमाग के पीछे खेले जा सकते हैं।  "एक, या तो न्यायाधीश खुद प्रमुखता के प्रवाह के साथ जा रहे थे। या, शायद उन्होंने महसूस किया होगा कि जब तक वे इसे हिंदू बहुमत नहीं देते हैं, तब तक विवाद कभी हल नहीं होगा। यह पूरी तरह से गलत सोच थी। SC को इसका पालन करना होगा।"  संविधान और कानून। मुझे निश्चित रूप से लगता है कि एससी प्रमुखतावाद के आगे झुककर संविधान को विफल कर दिया।  द...

*عمر عزیز کی قدر کریں* *از حضرت مولانا عبد الرشید صاحب المظاہری شیخ

بسم اللہ الرحمن الرحیم   *عمر عزیز کی قدر کریں*  *از حضرت مولانا عبد الرشید صاحب المظاہری شیخ الحدیث مدرسہ اسلامیہ عربیہ بیت العلوم سرائےمیر اعظم گڑھ یوپی* حضرت نبی کریم صلی اللہ علیہ وسلم نےارشاد فرمایا کہ جو باتیں میں جانتاہوں اگر ان کو تم جان لو ( اور تم پر وہ چیزیں منکشف ہوجائیں ) توتم رونے کی کثرت کرو اور تمہاری ہنسی اور مسکراہٹ کم ہوجاۓ یہ روایت بخاری شریف کی ہے ظاہر ہے کہ حساب و کتاب اور آخرت کے احوال کاعلم جو نبی کریم صلی اللہ علیہ وسلم کو تھا اور آپ کو اس کا جو انکشاف تھا  ہم امتیوں کووہ کہاں حاصل ہے تاہم نبی کریم صلی اللہ علیہ وسلم نےجو بتلایاہے وہ ہماری ھدایت اور درستگی کے لئے ناکافی نہیں مگر ہم نے دنیا میں پھنس کر ان امورکوجاننے کی فکر نہ کیا اور غفلت کی نیند سو رہے ہیں اللہ ہی رحم فرماۓ اور ہمیں اپنے احوال درست کرنے کی فکر نصیب فرماۓ  ایک موقع پر حضرت زینب رضی اللہ عنہانے نبی اکرم صلی اللہ علیہ وسلم سے سوال کیا کہ کیا ہم اس وقت بھی ہلاک ( اور تباہ وبرباد) ہوسکتے ہیں جبکہ ہمارے اندر صالحین موجود ہوں تونبی اکرم صلی اللہ علیہ وسلم نےارشاد فرمایا ہاں ای...

"मुस्लिम लीडरशिप" पर सोशल एक्टिविस्ट दाउद खान से खास बात चीत..

दाउद खान ट्विटर पर ज़ुल्म के खिलाफ उठने वाली आवाज़ों में एक बेहतरीन आवाज़ है.हमने उनसे मुस्लिम लीडरशिप पर कुछ सवाल पूछे उन्होंने बड़े बेबाकी से सारे जवाब दिए. सवाल 1- क्या भारतीय पॉलिटिक्स में मुस्लिम लीडरशिप होना ज़रूरी है या नहीं? अगर है तोह क्यों ज़रूरी है? जवाब 1- जी बिल्कुल, भारत एक लोकतांत्रिक देश है और हर विचारधारा को साथ लेके चलता है, चूंकि मुस्लिम इस देश का अभिन्न हिस्सा है तो पॉलिटिक्स में होना लोकतंत्र की खूबसूरती को बढ़ाता है और दूसरे नजरिए से देखिए तो मुसलमानों के मुद्दों जैसे ट्रिप्पल तलाक और अमेंडमेंट बिल के वक़्त अगर मुसलमानों कि तादाद संसद में अच्छी होती तो मुसलमानों के साथ ज्यादती ना होती और ये बिल पास ना होता.. चूंकि बहुत से सेक्युलर दल मुसलमानों का वोट लेते है लेकिन उनके मुद्दों पे बात नहीं करना चाहते इसलिए मुसलमानों कि लीडरशिप होना जरूरी है. सवाल 2- आप मुस्लिम लीडरशिप की बात करते है, लेकिन खुद मुसलमानों में इसको लेके काफी विरोध है आप उन सब को कैसे समझायेंगे की खुद की लीडरशिप होना कितना ज़रूरी है? जवाब 2-  देखिए शुरुआत में हर नई चीज का विरोध होता है, चूंकि मु...

शहीदों का बदला कब ~ नवदीप पवार

तूँ बन्दा हैं बेकार क्यूँ नही करता तूँ वार देश बोले बार बार तेरी फट्टे हर बार जनता जानती है सब नही चुप बैठेंगे अब अब खोल दे तूँ लब बता भारत को  #शहीदों_का_बदला_कब जनता माँगती जवाब दे जवानो का हिसाब नही क़ब्ज़ा हुआ तो शहीद हुए क्यूँ जनाब? कब तुझे आएगी शर्म कर भारत पे रहम थे वो माँ भारती के लाल कर उनकी शहादत को सलाम कर दिखा दुनिया को सब जनता जानती है सब नही चुप बैठेंगे अब अब खोल दे तूँ लब बता भारत को #शहीदों_का_बदला_कब मुँह में दही है जमीं सरेंडेर करीं क्यूँ सर ज़मीं मन की बात तेरी जनता ने हर बार है सुनी सुन सुन के पके है पर बात ना बनीं इस बार सबके है बात मन में ठनी अब तूँ सुन जन की बात मार चीन को तूँ लात दे पटकनी बॉर्डर पर मात नही चुप बैठेंगे अब अब खोल दे तूँ लब बता भारत को  #शहीदों_का_बदला_कब बड़ा बने तूँ राष्ट्रभक्त अब क्यूँ लगे हैं तुझे दस्त हमारे जवान हुए शहीद और तूँ चुनाव में है व्यस्त अब छोड़ अदाकारी पोल खुल गयी तेरी सारी समझ, जो तुझे मिली ज़िम्मेदारी अब पूरी कर सारी नही चुप बैठेंगे अब अब खोल दे तूँ लब बता भारत को  #शहीदों_का_बदला_कब

जेल से डॉक्टर कफ़ील खान का पत्र | Doctor Kafeel khan Letter

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डॉ। कफील खान को जेल में डाले हुए 156 दिन हो चुके हैं।  और किस आरोप में NSA? जीवन बचाना?  डॉ। कफील खान जेल से लिखते हैं।  उन्होंने मथुरा जेल में उनके द्वारा की जा रही कठिनाइयों को विस्तृत किया.. अपने पत्र में, खान ने अपनी दैनिक दिनचर्या को विस्तृत किया, सुबह 5 बजे जागने से शाम की मग़रिब की नमाज़ के बाद सो जाना।  "534 कैदियों के लिए बनाई गई जेल में, 1,600 लोग हैं जिनमें से एक बैरक में रखा गया है, जिसमें से कम से कम 100-125 लोग हमारे पास हैं।"  "सिर्फ 4-6 शौचालय हैं।"  डलिया (टूटे हुए गेहूं) या चना (छोले) के नाश्ते के बाद, खान ने कहा, वह अपने बैरक में जाने से पहले कुछ मिनटों के लिए टहलेंगे और अपने फट्टे (कंबल और बेडशीट का उपयोग करके बनाया गया बिस्तर) पर आराम करेंगे। उन्होंने लिखा, "लोग एक-दूसरे के बहुत करीब सोते हैं इसलिए सामाजिक भेद भूल जाते हैं। आप हर समय लाखों मक्खियों से घिरे रहते हैं।"  "आपको उन्हें दूर रखना है। भले ही आप 5-10 मिनट के लिए बीच में रुक जाएं, वे आपके शरीर पर आराम करते हैं।"  खान ने कहा कि उन्होंने जीवित रहने के लिए पानी वाली दाल...

प्राइवेटाइजेशन ऑफ़ रेलवेज| रेलवे प्राइवेटाइजेशन लेटेस्ट न्यूज़ | privatisation of railways

kya railway private hone wala hai ? क्या रेलवे का निजीकरण होगा? railway privatisation latest news 2020 रेलवे में अपने निकट-कुल एकाधिकार को विभाजित करने के लिए पहला कदम उठाया. सरकार ने बुधवार को 109 मूल गंतव्य (ओडी) मार्गों पर ट्रेन सेवाओं के संचालन के लिए निजी कंपनियों के लिए योग्यता (RFQ) के लिए 151 आधुनिक ट्रेनें कl अनुरोध आमंत्रित किया. यह भारतीय रेलवे की अपनी टरैन को निजी कपनियों द्वारा चलने की पहली पहल है.ऐसा करने से ट्रैन की हालत में सुधार आ सकता है यह कहना रेलवे का है . निजी ऑपरेटर अपनी तकनीक का चयन करेंगे । लेकिन सुरक्षा, ट्रेनों के टाइम-टेबलिंग आदि के कुछ पहलू रेलवे के पास रहेंगे.रेलवे का किराया भी नीजी कंपन्या तय करेगी ,हो सकता है किराया बढ़ा दिया जाये.  नीजी कंपन्या इनमें अदानी पोर्ट्स, टाटा रियल्टी और इन्फ्रास्ट्रक्चर, एस्सेल ग्रुप, बॉम्बार्डियर इंडिया और मैक्वेरी ग्रुप शामिल हैं। हालांकि, यह कोरोनोवायरस महामारी से पहले था। महामारी की दुनिया में, क्या वही खिलाड़ी बोली लगाएंगे? इस बिंदु पर यह अभी तक स्पष्ट नहीं है। हालांकि, यह देखते हुए कि इन खिलाड़ियों ने सरकार की क...