प्राइवेटाइजेशन ऑफ़ रेलवेज| रेलवे प्राइवेटाइजेशन लेटेस्ट न्यूज़ | privatisation of railways


kya railway private hone wala hai ?
क्या रेलवे का निजीकरण होगा?
railway privatisation latest news 2020


रेलवे में अपने निकट-कुल एकाधिकार को विभाजित करने के लिए पहला कदम उठाया. सरकार ने बुधवार को 109 मूल गंतव्य (ओडी) मार्गों पर ट्रेन सेवाओं के संचालन के लिए निजी कंपनियों के लिए योग्यता (RFQ) के लिए 151 आधुनिक ट्रेनें कl अनुरोध आमंत्रित किया.

यह भारतीय रेलवे की अपनी टरैन को निजी कपनियों द्वारा चलने की पहली पहल है.ऐसा करने से ट्रैन की हालत में सुधार आ सकता है यह कहना रेलवे का है . निजी ऑपरेटर अपनी तकनीक का चयन करेंगे । लेकिन सुरक्षा, ट्रेनों के टाइम-टेबलिंग आदि के कुछ पहलू रेलवे के पास रहेंगे.रेलवे का किराया भी नीजी कंपन्या तय करेगी ,हो सकता है किराया बढ़ा दिया जाये.

 नीजी कंपन्या इनमें अदानी पोर्ट्स, टाटा रियल्टी और इन्फ्रास्ट्रक्चर, एस्सेल ग्रुप, बॉम्बार्डियर इंडिया और मैक्वेरी ग्रुप शामिल हैं। हालांकि, यह कोरोनोवायरस महामारी से पहले था।
महामारी की दुनिया में, क्या वही खिलाड़ी बोली लगाएंगे? इस बिंदु पर यह अभी तक स्पष्ट नहीं है। हालांकि, यह देखते हुए कि इन खिलाड़ियों ने सरकार की कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लागू किया और उनके पास जो वित्तीय पेशी है, वे संभावित दावेदार हो सकते हैं।


प्राइवेट करने का मक़सद क्या है?
रेलवे का कहना है,की भविष्य में यह प्राइवेट कमपनिया भारत में ट्रैन बनाने के लिए अपना पैसा लगाएंगे.कुछ मकसद यह है की ऐसा करने से ट्रैन की टेक्नोलॉजी में नया सुधार आएगा नयी नयी टेक्नोलॉजी उपलब्ध होगी.ट्रेन के डब्बे की गिनती 16 कर दी जाएगी और उसी के साथ साथ रफ़्तार भी बढ़ा कर 160 कर दी जाएगी.इसका फायदा यह होगा की ट्रैन मंज़िल पे जल्दी पोहचेगी और यात्रियों की सुविधा के लिए ज़्यादा से ज़्यादा ट्रेनों को चलाया जा सकता है.
रेलवे का कहना है की उसने सिर्फ 150 ट्रेनों को अभी निजी कंपनियों को दिया है ,जब के रेलवे 13000 ट्रैन चलाता है
आगे यह 150 से बढ़ भी सकता है.
सरकार का यह भी कहना है की मेक इन इंडिया को ध्यान में रखते हुए हम यह कदम उठा रहे है जिससे भारत में ही ट्रैन  की मैन्युफैक्चरिंग होगी.

सरकार का यह कदम जनता के लिए अच्छा या बुरा?
निजी कंपनी द्वारा चलाई जाने वाली ट्रेनों का किराया सरकारी ट्रेनों से ज़्यादा रहेगा.जिसकी वजह से गरीब और मिडिल क्लास जनता प्राइवेट टाइनो में जाना पसंद नहीं करेगी.भारतीय रेलवे के स्वामित्व में एक फायदा यह  कि यह लाभ की परवाह किए बिना राष्ट्रव्यापी कनेक्टिविटी प्रदान करती है। यह निजीकरण के साथ संभव नहीं होगा क्योंकि जो मार्ग कम लोकप्रिय हैं उन्हें समाप्त किया जाएगा, इस प्रकार कनेक्टिविटी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा यह देश के कुछ हिस्सों को वस्तुतः दुर्गम भी बना देगा और उन्हें विकास की प्रक्रिया से बाहर कर देगा.
यह देखते हुए कि एक निजी उद्यम लाभ पर चलता है, लेकिन यह मानना ​​स्वाभाविक है कि भारतीय रेलवे में लाभ अर्जित करने का सबसे आसान तरीका किराए में वृद्धि करना होगा, इस प्रकार  सेवा को निम्न आय वर्ग के लिए पहुंच से बाहर कर देगा.यह उस प्रणाली के पूरे उद्देश्य को हरा देगा जो आय के स्तर के बावजूद देश की पूरी आबादी की सेवा करने के लिए है.

मेरा कहना है की ट्रैन का निजीकरण यह कोई उपाय नहीं है.
हो सकता है कि समय की आवश्यकता एक संतुलित समाधान खोजने की है जो निजी और सरकारी दोनों उद्यमों के पेशेवरों को शामिल करेगा.भारतीय रेलवे की छवि को बढ़ाएगा क्योंकि यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सेवा करता है.



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