एक और मॉबलिंचिंग मुसलिम नौजवान के साथ..
"एक और मॉबलिंचिंग मुसलिम नौजवान के साथ"
🖊️ वहीदुज्जमां सिद्दीकी
आज से 2 दिन पहले 6 जून 2020 को सितामरही, बिहार में रात के 9 बजे शर-पसंदों, देहशतगर्दों की भीड़ ने मकाई (मक्का) चोरी के इल्ज़ाम में एक मुस्लिम नौजवान "मुहम्मद वाहिद" पर लाठी, चाकू, व दुसरे हथियारों व शस्त्रों से हमला करते हुए फिर से एक मर्तबा गुंडागर्दी व देहशतगर्दी का सबूत पेश किए हैं।
बताया जा रहा है कि मॉबलिंचिंग करने वाले यादव थे। और बजरंग दल से इनका ताल्लुक था।
नौजवान का कहना है कि वह अपने किसी काम से बाहर गया था और वापसी में कुछ लोगों ने पहले उसका नाम पुछा और फिर जब नौजवान ने अपना नाम "मुहम्मद वाहिद" बताया तो उन्होंने उर्दू नाम सुनते ही लाठी, छोरी, व दुसरे हथियारों व शास्त्रों से पिट पिट कर जान से मारने की कोशिश किये पर वह मशहूर कहावत है न के :
मुद्दयी लाख बुरा चाहे तो क्या होता है,
बही होता है जो मंज़ूर-ए खुदा होता है।
और रब के करम से नौजवान जिंदा बच गया!
नौजवान से रिपोर्टर ने जब पुछा के क्या आप ने अभी तक इसका कोई इलाज करवाये? तो नौजवान का उत्तर था कि पैसे न होने के कारण अभी तक कोई इलाज नहीं करवा पाया हूं!
हैरत की बात यह है कि 3 दिन गुज़रने को है, 6 जुन को मॉबलिंचिंग हुआ है लेकिन अभी तक बिहार पुलिस ने कोई भी एक्शन नहीं लिया है। बहुत मिन्नत समाजत के बाद FIR तो हो गई है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
जिन लोगों ने मॉबलिंचिंग किये हैं उन में से कुछ लोगों को "मुहम्मद वाहिद" खुद पहचानता है पर सबको नहीं जानता है, जिनका नाम "वाहिद" को पता था जो गौरा गांव से ताल्लुक रखते थे जिनका नाम "राम नरेश राय, राम ईश्वर राय, सीताराम राय, राम कुमार राय" है।
क्या मुस्लमान होना कोई गुनाह है, जो इतने बड़े हादसे के बावजूद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है? पुलिस कब ईन मुजरिमों पर कार्रवाई करेगी? पुलिस कब इस मॉबलिंचिंग के खिलाफ एक्शन लेगी?
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